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एंजेलीना जोली ने अफगानिस्तान की लड़की की मदद का किया वादा

मुंबई: हॉलीवुड एक्ट्रेस एंजेलीना जोली ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है. इस पोस्ट में उन्होंने अफगानिस्तान  की एक टीनएज लड़की का लिखा हुआ लेटर शेयर किया है. अपने पोस्ट के माध्यम से एंजेलीना ने अफगानिस्तान के लोगों की मदद करने के लिए अपनी आवाज बुलंद करने का वादा किया है.

इसके लिए एंजेलीना ने इंस्टाग्राम पर कदम रख दिया क्योंकि उन्हें अफगानिस्तान के लोगों का दर्द देखा नहीं जा रहा है. तालीबान के कब्जे के बाद वहां के हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं. खास कर लड़कियों के लिए तो हालात बेहद खौफनाक है.

 

46 साल की एंजेलीना जोली ने  इंस्टाग्राम पर अपने पहले पोस्ट में लिखा है कि ‘यह लेटर अफगानिस्तान की एक टीएनएज लड़की से मिला है. अभी अफगानिस्तान के लोग खुलकर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने में सक्षम नहीं है, इसलिए मैं इंस्टाग्राम पर उनकी स्टोरी शेयर करने के लिए आई हूं और जो अपनी बेसिक ह्यूमन राइट्स के लिए लड़ रहे हैं, मैंने उनकी आवाज बनने का फैसला किया है’. अपनी इस पोस्ट के साथ एंजेलीना ने अफगानी लड़की का लेटर और बुर्के में लिपटी हुई लड़कियों की फोटो शेयर की है.

अपने पोस्ट में एंजेलीना ने आगे लिखा ‘9/11 की घटना से 2 हफ्ते पहले वह अफगानिस्तान बॉर्डर पर थीं और लाखों अफगान शरणार्थियों से मुलाकात की थी. यह 20 साल पहले की बात है. एक बार फिर अफगान डर और विस्थापन के शिकार हो गए हैं. इतना समय और पैसा खर्च करने के बाद खूनी खेल यह एक बड़ा फेल्योर है.

दशकों से यह देखा कि कैसे अफगान शरणार्थियों को दुनिया के कैपेबल लोगों ने  एक बर्डेन की तरह देखा. यह जानते हुए भी कि अगर उनके पास टूल्स और रिस्पेक्ट होता तो अपने लिए कुछ कर पाते. और कई महिलाओं और लड़कियों से मुलाकात हुई जो न केवल पढ़ना चाहती हैं बल्कि लड़ना भी चाहती हैं. आगे लिखती हैं कि मैं अपने कमिटमेंट से पीछे नहीं हटूंगी. मैं लोगों की मदद करती रहूंगी और उम्मीद है कि आप लोग मेरा साथ देंगे’.

 

एंजेलीना जोली का इंस्टाग्राम पर लोगों ने स्वागत किया है और उनके इस कदम की सराहना कर रहे हैं. अफगानिस्तान के बिगड़ते हालात के मद्देनदर देश-दुनिया के तमाम कलाकार हर दिन सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे हैं. बता दें कि एंजेलीना जोली संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अधिकारों की ब्रांड एम्बेसडर हैं.

 

बता दें कि जैसे ही अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा वहां तालिबानियों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया. 15 अगस्त को काबुल में प्रेसिडेंट के महल पर कब्जा कर लिया. अफगानिस्तान पर तालीबान के पिछले हूकूमत के दौर को याद करते  हुए दहशत का माहौल बना हुआ है. 1996 से 2001 के अपने शासन में तालीबान ने सबसे ज्यादा जुल्म लड़कियों और महिलाओं पर किया था.

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