Notifications
×
Subscribe
Unsubscribe
Hindi Khabrein

कोरोना संक्रिमतों के इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों में मची लूट

गोरखपुर। कौड़ीराम के देउरवीर की गंगोत्री देवी पत्नी रामनरेश मौर्य को सांस लेने में दिक्कत हुई तो स्वजन बाबा राघवदास मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे। यहां बेड न उपलब्ध होने की जानकारी मिली तो स्वजन ने उन्हें मेडिकल कालेज के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। हालत गंभीर बता कर भर्ती, जांच और दवा के नाम पर 52 हजार रुपये जमा कराए गए। गंगोत्री देवी भर्ती तो हो गईं लेकिन उनके स्वास्थ्य की स्थिति बताने में आनाकानी शुरू हो गई। पूरी रात स्वजन गिड़गिड़ाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सुबह अस्पताल के मैनेजर के साथ एक डाक्टर पहुंचे और बोले कि तत्काल 25 हजार रुपये जमा करा दो और शव लेकर जाओ। विरोध करने पर शव से अंगूठी और कान की बाली निकाल लिए।

इतना ही नहीं कर्मचारियों ने जान से मारने की धमकी देनी शुरू की तो स्वजन शव लेकर गांव चले गए। कोरोना संक्रिमतों के इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों में लूट मची हुई है। गंभीर हालत में भर्ती कराए गए मरीजों की भी स्थिति की जानकारी स्वजन को नहीं दी जा रही है। एक मरीज के स्वजन से 77 हजार रुपये जमा कराने के बाद बताया गया कि उनकी मौत हो गई है, शव जल्दी ले जाइए। रुपये न मिलने पर आरोप है कि शव से अंगूठी और बाली तक निकाल लिए। मरीज पहुंचने के साथ ही वसूली का शुरू खेल मरीज की हालत बिगड़ने के साथ और बढ़ता जा रहा है।

मरीज को भर्ती कराने के साथ 50 हजार से एक लाख रुपये जमा कराए जा रहे हैं। जांच, इलाज के नाम पर लगातार बिल बढ़ता जा रहा है। मुंहमांगी रकम देने के बाद भी मरीजों की स्थिति की सही जानकारी कई अस्पताल स्वजन को नहीं दे रहे हैं। अच्छे इलाज के लिए यदि स्वजन मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाना चाह रहे हैं तो भी बिना वसूली जाने नहीं दिया जा रहा है। कोई स्वजन शिकायत कर रहा है तो अफसर उन्हीं को समझा-बुझाकर वापस कर दे रहे हैं।

इसी प्रकार जैतपुर के भगवानपुर भेलइंद्री की नीलम सिंह पत्नी स्व. विजय प्रताप सिंह को सांस लेने में दिक्कत के बाद स्वजन बाबा राघवदास मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे। यहां जगह न मिलने पर स्वजन मेडिकल कालेज के सामने स्थित एक अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां दोपहर में भर्ती करने के साथ ही पहले 27 हजार रुपये, जांच व दवा के नाम पर 14 हजार रुपये जमा कराए गए। शाम को स्वजन को पता चला कि मेडिकल कालेज में बेड खाली है तो वह मरीज को रेफर करने के लिए बोले। पहले तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उनकी एक न सुनी, बाद में दबाव बनाने पर 19 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया। इलाज में हुए खर्च का हिसाब मांगने पर अस्पताल प्रबंधन नहीं दे सका। स्वजन मरीज के पास गए तो उन्होंने बताया कि इलाज के नाम पर सिर्फ आक्सीजन लगाया गया है। कोई दवा भी नहीं दी गई। स्वजन ने विरोध शुरू किया तब जाने दिया गया।

भर्ती कराने के साथ ही कोरोना संक्रमित मरीज के स्वजन से दवा और आक्सीजन के नाम पर भी जमकर वसूली हो रही है। आइसीयू बेड और वेंटिलेटर बेड के नाम पर रोजाना 30 से 40 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। मरीज को ठीक कराने के लिए हर स्तर पर तैयार स्वजन रुपये देने में आनाकानी भी नहीं कर रहे हैं।

तारामंडल रोड पर कुछ ही अस्पतालों को कोविड अस्पताल की मान्यता मिली है लेकिन यहां ज्यादातर अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों को भर्ती किया जा रहा है। स्वजन अपने मरीज को स्वस्थ करने के लिए ऐसे अस्पतालों में उन्हें भर्ती कर रहे हैं। इनमें से कई अस्पतालों में तो स्वजन को ही आक्सीजन सिलेंडर की भी व्यवस्था करनी पड़ रही है।

Back to top button