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5G Safe Or Dangerous: 5G इंसान और धरती की सेहत के लिए खतरा है ? जूही ने अदालत से 5जी नेटवर्क पर रोक लगाने की मांग की
 
5G Safe Or Dangerous: 5G इंसान और धरती की सेहत के लिए खतरा है ? जूही ने अदालत से 5जी नेटवर्क पर रोक लगाने की मांग की

5जी तकनीक का इंसानों और पर्यावरण पर क्‍या असर हो सकता है, इसे लेकर शुरुआत से ही बहस चलती रही है। अभिनेत्री जूही चावला  ने अदालत से भारत में 5जी नेटवर्क खड़ा करने पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका पर 2 जून को सुनवाई होनी है। G का विरोध करने वालों में बॉलिवुड की चुलबुली ऐक्‍ट्रेस जूही चावला का नाम भी जुड़ गया है। उन्हें भी लगता है कि 5G से धरती को बहुत नुकसान होगा।

उन्‍होंने दिल्‍ली हाई कोर्ट में याचिका डाली है कि भारत में 5G वायरलेस नेटवर्क की शुरुआत न होने दी जाए। जूही कहती हैं कि 5G से नागरिकों, जानवरों, पेड़-पौधों को खतरा है। उनके मुताबिक, अगर 5G नेटवर्क आया तो धरती पर ऐसा कोई शख्‍स, जानवर, च‍िड़‍िया या पौधा नहीं होगा जो साल के 365 दिन रेडिएशन से बच पाए। जूही का दावा है कि तब रेडिएशन आज के मुकाबले 10 से 100 गुना ज्‍यादा होगा।

भारत में कहां तक पहुंचा, और क्‍या है 5G ?

  • 5G यानी पांचवीं पीढ़ी का मोबाइल नेटवर्क। आप और हम 2G, 3G, 4G से तो वाकिफ हैं, 5G उसका अगला संस्‍करण है। 5G से ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जहां हर कोई हर चीज से वर्चुअली कनेक्‍ट हो पाएगा फिर चाहे वह मशीन हो या डिवाइसेज।

  • 5G के जरिए कनेक्टिविटी की रफ्तार बेहद तेज हो जाएगी। 10 गी‍गाबिट्स पर सेकेंड (10 Gbps) की स्‍पीड से कुछ भी डाउनलोड कर सकेंगे। इसमें लेटेंसी बेहद कम होगी। नेटवर्क कैपेसिटी ज्‍यादा होगी।

  • डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्‍युनिकेशंस (DoT) ने तीन दिन पहले 5G ट्रायल स्‍पेक्‍ट्रम अलॉट कर दिया है। इससे रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) के लिए रास्‍ता साफ हो गया है। जियो और एयरटेल के पास पहले से 5G रेडी नेटवर्क्‍स हैं। हालांकि अभी तक 5G ट्रायल्‍स शुरू नहीं हो सके हैं।

5G टेक्‍नोलॉजी भारत के लिए जरूरी है ?

दुनिया में 40 से ज्‍यादा टेलिकॉम ऑपरेट्स 5G लॉन्‍च कर चुके हैं। 4G को भारत में धमाकेदार सफलता मिली। 5G से भारत की टेलिकॉम कंपनियों को कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर कंज्‍यूमर्स, इंडस्‍ट्रीज और इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए हल निकालने का मौका मिलेगा। डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमाने का जो सपना भारत 90 के दशक से देखा रहा है, उसके साकार होने के लिए 5G बेहद जरूरी है।

कोविड-19 महामारी के दौर ने भी हमें सिखाया है कि डिजिटिल को आगे बढ़ाने की जरूरत है। हमें 5G जैसी लो लेटेंसी वाली तकनीक चाहिए जिनकी मदद से रिमोटली मेडिकल ऑपरेशन किए जा सकें। मोबाइल बैंकिंग, ई-क्‍लासरूम्‍स, रिमोट वर्किंग, टेलीमेडिसिन... इन सभी के लिए अच्‍छी-खासी बैंडविड्थ की जरूरत पड़ती है।

इंसानी सेहत और पर्यावरण से जुड़ी वैज्ञानिकों की चिंताएं क्‍या हैं?

भारत के कई नामी वैज्ञानिकों ने 5G को लेकर जल्‍दबाजी न करने को कहा है। दो साल पहले, कई वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था जिसमें उन्‍होंने कहा था कि 5G से इंसानी सेहत और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना था कि 5G से पहले विस्‍तार से रिसर्च की जरूरत है क्‍योंकि रेडिएशन का असर अक्‍सर देर से दिखता है। उन्‍होंने कहा था कि अगर इसे इंसानों के लिए सुरक्षित मान लिया भी जाए तो भी पेड़-पौधों पर इसके असर पर ढेर सारी रिसर्च होनी चाहिए।

5G को लेकर WHO की क्‍या राय है?

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार 5G इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर से जो एक्‍सपोजर होता है, वह 3.5 GHz के बराबर होता है। यह अभी के मोबाइल बेस स्‍टेशन के बराबर ही है। WHO की वेबसाइट के अनुसार, अभी चूंकि यह तकनीक विकसित हो रही है, ऐसे में और रिसर्च होनी चाहिए।

WHO के अनुसार, अभी तक की रिसर्च में वायरलेस तकनीकों का सेहत पर कोई दुष्‍प्रभाव सामने नहीं आया है। WHO की 5G पर राय आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

5G से सेहत को लेकर ज्‍यादा चिंता की जरूरत नहीं: IIT डायरेक्‍टर

भारत के मशहूर टेक एक्‍सपर्ट्स में से एक, IIT कानपुर के डायरेक्‍टर अभय करंदीकर के अनुसार, RF रेडिएशंस से स्‍वास्‍थ्‍य पर किसी तरह के दुष्‍प्रभाव की बात किसी रिसर्च में सामने नहीं आए हैं। उनके मुताबिक, 5G को अलग-अलग स्‍पेक्‍ट्रम बैंड्स में डिप्‍लॉय किया जाएगा। मशहूर बैंड्स कम फ्रीक्‍वेंसी वाले होंगे। हाई फ्रीक्‍वेंसी रेंज वाले बैंड्स की कवरेज छोटी होगी है और उनकी रेडिएशन पावर भी सीमा के भीतर होगी। करंदीकर के मुताबिक, 5G से सेहत को लेकर ज्‍यादा चिंता की जरूरत नहीं है।

5G को लेकर ऐसी अफवाह तक उड़ गई थी

सोशल मीडिया से लेकर गांव-कस्‍बों में पिछले दिनों एक अफवाह खूब फैली। 5G टावरों की टेस्टिंग के चलते कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई, यह मेसेज खूब वायरल हुआ। कहा गया कि 5G से इंसान और जानवर खत्‍म हो जाएंगे। जबकि इस दावे में कोई दम नहीं था। WHO और केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने ऐसी किसी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। दोनों ने साफ कहा कि 5G का कोविड-19 से कोई लेना-देना नहीं है।

5G के पर्यावरण पर असर को लेकर क्‍या कहा गया है?

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन पर छपे एक लेख के अनुसार, 5G से निश्चित तौर पर दुनियाभर में ऊर्जा का इस्‍तेमाल बढ़ेगा। लेख में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के लिए उर्जा का बढ़ता इस्‍तेमाल भी एक प्रमुख वजह है। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ ज्‍यूरिख की एक स्‍टडी कहती है कि 2030 तक 5G नेटवर्क्‍स के जरिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्‍सर्जन 4G नेटवर्क्‍स से कम हो जाएगा।